एक विचारशील उद्घोष — सत्यम सिंह उर्फ़ सत्यम हिंदू प्रचारक द्वारा
जब एक हिंदू राष्ट्र में, हिंदू होना ही सबसे बड़ा अपराध बन जाए,
जब मंदिरों पर हमला हो और तुष्टिकरण पर ताली बजे,
जब राम का नाम लेने पर कानून से ज़्यादा आलोचना हो —
तो सवाल उठता है:
“क्या भारत अब हिंदुओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है?”
इतिहास गवाह है — हिंदू समाज को बार-बार निशाना बनाया गया
भारत की स्वतंत्रता के बाद, अनेक बार हिंदू समाज पर संगठित रूप से हमला हुआ।
कुछ घटनाएँ आज भी हमें अंदर तक झकझोर देती हैं:
-
1989 – कश्मीर में हिंदू नरसंहार:
“Raliv, Galiv ya Chaliv” – यानी धर्म बदलो, मर जाओ या भाग जाओ।
हज़ारों कश्मीरी पंडितों की हत्या, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, और लाखों को बेघर कर दिया गया। -
2002 – गोधरा कांड:
59 निर्दोष कारसेवकों को ट्रेन में जिन्दा जलाया गया। इसके बाद जो दंगे हुए, उनमें मीडिया और वामपंथी बुद्धिजीवियों ने सिर्फ एक पक्ष को दोषी ठहराया। -
2013 – मुज़फ्फरनगर दंगे:
दो हिंदू युवकों की हत्या से शुरू हुआ मामला सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया, परंतु “अल्पसंख्यक पीड़ित” नैरेटिव गढ़ा गया। -
पश्चिम बंगाल और केरल में दुर्गा पूजा और रामनवमी पर प्रतिबंध:
जहाँ दुर्गा विसर्जन को “ध्वनि प्रदूषण” बताया जाता है, वहीं अन्य धर्मों के जुलूसों पर कोई सवाल नहीं उठते।
हिंदू महिलाओं के खिलाफ खुली धमकियाँ — चुप क्यों है कानून?
आज सोशल मीडिया और दंगों के दौरान हिंदू स्त्रियों के विरुद्ध बलात्कार की धमकियाँ आम हो चुकी हैं। यह केवल अपराध नहीं, एक मानसिक युद्ध है।
-
कट्टरपंथी वीडियो में “हिंदू औरतों को उठा लो” जैसे नारे।
-
दंगों में सामूहिक उत्पीड़न: कई रिपोर्ट्स आती हैं, परंतु कार्यवाही अक्सर राजनीतिक चश्मे से होती है।
“सनातन धर्म को समाप्त करो” — खुले मंचों से यह जहर क्यों?
तमिलनाडु सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने कहा:
“सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है, इसे पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए।“
यह कोई साधारण बयान नहीं, बल्कि सनातन आस्था पर सीधा हमला है।
और क्या हुआ? कांग्रेस, DMK, वामपंथी सभी या तो चुप रहे या समर्थन में खड़े हो गए।
कांग्रेस के नेता — हिंदू धर्म के खिलाफ खुली घृणा
-
राहुल गांधी: हिंदुत्व को हिंसा से जोड़ने की कोशिश बार-बार की गई।
-
प्रियंका गांधी: भगवा पहनने वालों को बलात्कारी कहा गया।
-
मणिशंकर अय्यर: हिंदू समाज को भारत के विभाजन का दोषी बताया।
इन बयानों में एक पैटर्न दिखता है — हिंदू धर्म को बदनाम कर, तुष्टिकरण की राजनीति चमकाना।
BJP या RSS पर आश्रित रहने का समय गया — अब आत्मनिर्भर बनो
हिंदू समाज को अब यह समझना होगा कि सिर्फ राजनीतिक दलों के भरोसे धर्म की रक्षा नहीं होगी।
अब समय है कि हम अपने अंदर नेतृत्व, संगठन और जागरूकता का बीज बोएँ।
विराथु (Ven. Wirathu) से प्रेरणा — समाज के लिए खड़ा संत
बौद्ध भिक्षु विराथु ने म्यांमार में जिस प्रकार अपने समुदाय को कट्टरपंथ के खिलाफ चेताया,
उसी प्रकार भारत के हिंदू समाज को चाहिए:
-
-
स्वयं आक्रामक नहीं, लेकिन सजग और संगठित बनें
-
धार्मिक जागरूकता से लेकर सांस्कृतिक रक्षक बनें
-
समाज के हर क्षेत्र – शिक्षा, मीडिया, प्रशासन – में प्रतिनिधित्व बढ़ाएँ
-
धर्मरक्षा का मंत्र — आज नहीं तो कभी नहीं
“जब धर्म संकट में हो, तो केवल भक्त नहीं, रक्षक भी बनो।”
“जब आस्था पर हमला हो, तो चुप रहना भी अधर्म है।”
यह उद्घोष सत्यम सिंह उर्फ़ सत्यम हिंदू प्रचारक का है
“मैं यह बात किसी राजनीति से प्रेरित होकर नहीं कह रहा,
बल्कि एक सनातनी, एक राष्ट्रभक्त, और एक जिम्मेदार हिंदू के नाते कह रहा हूँ —अब बहुत हो चुका…
अब हम चुप नहीं रहेंगे, अब हम सशक्त बनेंगे।
अब हम सिर्फ पूजा नहीं करेंगे —
अब हम रक्षा करेंगे, संगठन बनाएंगे, और हिंदू पुनर्जागरण का बिगुल बजाएँगे।”— सत्यम सिंह
(“सत्यम हिंदू प्रचारक”)